सर्व हरियाणा ग्रामीण बैंक में भ्रष्टाचार की खुलती परत-दर-परत

सर्व हरियाणा ग्रामीण बैंक में स्वीकृत हुए 10 करोड़ के हाउस लोन में हुए घोटाले को उजागर करते हुए आपसे मांग की थी कि उपरोक्त मामले की गहन जांच करवाई जाए।
जनाब मैं आपके संज्ञान में पुनः लाना चाहता हूं कि यदि मामले की निष्पक्ष जांच हुई होती तो इस ऋण को स्वीकृत करने वाले अधिकारियों तत्कालीन चेयरमैन मानवेन्द्र प्रताप सिंह व महाप्रबंधक राजेश गोयल एवं मामले को दबाने के दोषी अधिकारी वर्तमान चेयरमैन ए.के.नंदा के खिलाफ ऋणी को अवांछनीय लाभ देकर बैंक के पैसों व अपने पद का दुरुपयोग कर आर्थिक गबन का मामला बनता था जिसकी सी.बी.आई जांच करवा कर इन तीनों अपराधियों को जेल भेजा जाना चाहिए था। सर, यदि क्षेत्रीय कार्यालय गुड़गांव (जहां से इस ऋण को स्वीकृति के लिए हेड आफिस भिजवाया गया था) के प्रोसेस नोट (कापी संलग्न) का ही अवलोकन किया जाए तो साफ साफ पता चलता है कि यह ऋण स्वीकृति योग्य था ही नहीं। और इतनी आपत्तियों के बावजूद यह ऋण क्यों स्वीकृत किया गया, यह बतलाने की आवश्यकता नहीं है। इस प्रोसेस नोट कुछ अंश मैं यहां इस आशय से उजागर कर रहा हूं ताकि आपको थोड़ी आसानी हो :-
यह ऋण पहले एक NBFC से Loan against property के तहत दिया गया था जिसे हाउस लोन स्कीम के तहत दिया जाना ही त्रुटिपूर्ण है।
ऋणियों की मासिक आमदनी को गलत तरीके से दिखाया गया है। (प्रोसेस नोट पेज नं 22, पैरा 5)
भविष्य की मनघडंत आमदनी दिखाई गई, तीन किरायानामे इसका जीवंत सबूत है। (प्रोसेस नोट पेज नं 22, पैरा 2)


किराया 01-11-2017 से शुरु होना बताया गया जबकि उस वक्त यह फ्लैट निर्माणाधीन था जिसे पूरा होने में कम से कम 12 माह का समय और लगना था। (प्रोसेस नोट पेज नं 22 पैरा 3)
(प्रोसेस नोट के पेज नं 21 एवं 22 अपने आप में बहुत कुछ कहते हैं)
हालांकि 29-11-2017 को मेल के माध्यम से जब इस प्रोपोजल संबंधित तमाम खामियां रिपोर्ट कर दी गई, तो भी रीजनल मैनेजर पर दबाव डाला गया कि आप इसे स्वीकृति के लिए भेजने का अनुमोदन करें। 04-12-2017 का यह इस प्रोसेस नोट दोबारा भेजा गया जिसमें रीजनल आफिस द्वारा तमाम खामियां रिपोर्ट की गई परन्तु इन सबके बावजूद यह ऋण स्वीकृत किया गया, क्यों ? चर्चा है कि इस ऋण को स्वीकृत करने के लिए एक मोटी रकम मानवेन्द्र प्रताप सिंह व राजेश गोयल ने ली जिसके बंटवारे को लेकर इन दोनों का झगड़ा भी हुआ।
नया खुलासा :- दिनांक 23-01-2020 को स्वयं ऋणी द्वारा बैंक को बताया गया कि ऋणी ने दिनांक 28-03-2018 को ही कथित फ्लैट बेच दिया था। (दिनांक 28-03-2018 को किया गया इकरारनामा संलग्न है) दिनांक 12-12-2017 को स्वीकृत ऋण मात्र 3 महीने में ही पार्टी द्वारा बेचने के बावजूद हेड आफिस का क्या फोलो-अप रहा, अपने आप में संदेहास्पद है। ऋणी द्वारा unlawful तरीके से फ्लैट बेचे जाने का पता चलने के बाद तो बैंक को तुरंत हरकत में आ जाना चाहिए था परन्तु नंदा जी ने जानबूझकर यह तथ्य छुपाये रखा ताकि राजेश गोयल की रिटायरमेंट में समस्या उत्पन्न न हो। 28 मार्च को किये गए इकरारनामे में दो साल का समय लिखवाया गया जोकि प्रचलन से अलग होने के कारण भी संदेहास्पद है।

वास्तविकता तो यह है कि यह फ्लैट Sale Purchase के मकसद से ही खरीदा गया था जिसकी जानकारी पहली बार लोन देने वाली NBFC से लेकर मानवेन्द्र प्रताप सिंह, राजेश गोयल व नंदा जी सबको थी। परन्तु NBFC के अधिकारी सयाने थे जिन्होंने रिपेमेंट पीरियड 1 साल रखा व इसके बाद मूलधन वापस न करने की दशा में ब्याज दर 24 % रखी। सब कुछ जानते हुए भी सर्व हरियाणा ग्रामीण बैंक के उपरोक्त वर्णित तीनों तीनों अधिकारियों ने ऋणी को अवांछित लाभ पहुंचाया। विभिन्न स्तरों पर शिकायत करने के बाद उक्त खाते को टेक-ओवर करवाने के प्रयास जारी हैं परन्तु बावजूद इसके अभी तक पहुंचाये गए अवांछित लाभ का आंकड़ा लगभग 3 करोड़ रुपये है।
सर, मेरी आपसे पुनः अपील है कि इस साजिश में संलिप्त सभी अधिकारियों मानवेन्द्र प्रताप सिंह, राजेश गोयल व ए.के.नंदा के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करवाया जाए व इस मामले की सी.बी.आई जांच करवाई जाए व दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाये।
धन्यवाद।

मुकेश जोशी
चीफ कॉर्डिनेटर
सर्व हरियाणा ग्रामीण बैंक ऑफिसर्स ऑर्गेनाइजेशन एवं गुड़गांव ग्रामीण बैंक वर्कर्स ऑर्गेनाइजेशन(9810347532)

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